संभलना ज़रूरी है: जनसंख्या बनाम प्रकृति

बढ़ती जनसंख्या की विकरालता का सीधा प्रभाव प्रकृति पर पड़ता है जो जनसंख्या के आधिक्य से अपना संतुलन बैठाती है और फिर प्रारम्भ होता है असंतुलित प्रकृति का क्रूरतम तांडव जिससे हमारा समस्त जैव मण्डल प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता।

इस बात की चेतावनी आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व माल्थस नामक अर्थशास्त्री ने अपने एक लेख में दी थी। इस लेख में माल्थस ने लिखा है कि यदि आत्मसंयम और कृत्रिम साधनों से बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित नहीं किया गया तो प्रकृति अपने क्रूर हाथों से इसे नियंत्रित करने का प्रयास करेगी।

यदि आज हम अपने चारों ओर के वातावरण के संदर्भ में विचार करें तो पाएंगे कि प्रकृति ने अपना क्रोध प्रकट करना प्रारम्भ कर दिया है। आज सबसे बड़ा संकट ग्रीन हाउस प्रभाव से उत्पन्न हुआ है, जिससे वातावरण के प्रदूषण के साथ पृथ्वी का ताप बढ़ने और समुद्र जल स्तर के ऊपर उठने की भयावह स्थिति उत्पन्न हो रही है।

हाल ही में आई एक रिपोर्ट बताती है कि 50 साल के भीतर मालदीव द्वीप समुद्र में डूब जाएगा। यह गहरी चिंता का विषय है|

हम मानते हैं कि किसी भी समस्या को हल करने के लिए, पहला कदम उस पर बातचीत शुरू करना है। मोबियस फाउंडेशन बढ़ती जनसंख्या और हमारे पर्यावरण पर इसके प्रभाव पर बातचीत शुरू करने के लिए कदम बढ़ा रहा है।

हमने एक राष्ट्रीय मंच- ज़ी मीडिया (Zee Media) पर विषय चर्चा शुरू करने के लिए भागीदारी की है।

#MissionSustainabilityConclave #PopulationVsPlanet

द ग्राउंड लॉंच: चैनल WION पर, शनिवार 20 फरवरी 2021 को 17:00 से 19:00 बजे तक

 

कार्यक्रम ऑडियो विजुअल के साथ शुरू हुआ जिसमें बढ़ती जनसंख्या पर माननीय प्रधान मंत्री का संदेश शामिल था:

“जनसंख्या विस्फोट हमारे और हमारी भावी पीढ़ियों के लिए कई नई समस्याएं पैदा कर सकता है, लेकिन जनता का एक सतर्क वर्ग है जो इस मुद्दे से अवगत है |”

स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने इस साल भर के जागरूकता अभियान की शुरुआत करने पर सराहना की। उन्होंने आगे कहा कि “जनसंख्या में तेजी ग्रह और मानव जाति को कई मायनों में प्रभावित कर रही है, भारत जैसे विकासशील देशों में लोग पर्यावरण समस्याओं के प्रभाव को अधिक तीव्रता से महसूस करते हैं।

लॉन्च सत्र को तीन खंडों में विभाजित किया गया था:

सत्र 1: जनसंख्या बनाम पर्यावरण | संतुलन बनाए रखना

पृथ्वी की जनसंख्या आज ७८० करोड़ है और हर साल करीब ८ करोड़ ३० लाख लोग इस दुनिया मई बढ़ रहे है। सयुक्त राष्ट्र का अनुमान है की वर्ष २०५० तक पृथ्वी की जनसंख्या ९७० करोड़ होगी।

पहले सत्र में हम वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के नुकसान जैसी पर्यावरण समस्याओं के बारे में बात करते हैं और ये सभी दुनिया भर में बढ़ती आबादी से सीधे कैसे जुड़े हुए हैं ।

इस समस्या को सुलझाने के लिए हमे सबसे पहले हरित ऊर्जा पर ध्यान करना चाहिए।

 

आइये हम मिल कर इस जनसंख्या विस्फोट का सामना करें और हमारी धरती को बचाएं।